✒️ रिपोर्ट: Suniye Bharat संवाददाता
📅 तारीख: 4 जुलाई 2025
उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवाओं में एक बार फिर अनुशासनहीनता का गंभीर मामला सामने आया है। निलंबित उपनिदेशक यादवेंद्र सिंह यादव ने बुधवार को इंदिरा भवन स्थित पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के दफ्तर में विभाग की निदेशक — एक वरिष्ठ महिला IAS अधिकारी — से अभद्र व्यवहार किया और कार्यालय में हाथापाई की स्थिति पैदा कर दी। यह घटना न केवल प्रशासनिक गरिमा के लिए धब्बा है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाती है।
घटना का ब्यौरा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यादवेंद्र सिंह जबरन दसवीं मंजिल पर स्थित निदेशक के कक्ष में घुसे और तीखी भाषा में बात करने लगे। निदेशक ने संयम बनाए रखते हुए उन्हें कार्यालय छोड़ने की सलाह दी, लेकिन इसके बाद वह और उग्र हो गए। आरोप है कि उन्होंने एक अन्य उपनिदेशक के साथ भी बदसलूकी की और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
घटना के बाद कार्यालय का माहौल भय और तनाव से भर गया। कर्मचारियों का कहना है कि यह घटना केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि खुलेआम प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने जैसा था।
पूर्व विवादों का इतिहास
यादवेंद्र सिंह कोई नए विवादों में नहीं हैं। उन्हें पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने और सरकार विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण निलंबित किया गया था। उनके X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से “गोरखपुर का गुंडा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर मुख्यमंत्री पर हमले किए गए थे।
सूत्रों का कहना है कि शासन को संदेह है कि यादव समाजवादी पार्टी की विचारधारा के “स्लीपर सेल” के तौर पर प्रशासन में काम कर रहे थे।
कार्रवाई की संभावना
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय और कार्मिक विभाग को भेज दी गई है। संभावना जताई जा रही है कि यादवेंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, सेवा से बर्खास्तगी की सिफारिश भी की जा सकती है।
विभागीय अधिकारियों ने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक मर्यादाओं की खुली अवहेलना करार दिया है। कई वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह घटना केवल ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ का उल्लंघन नहीं, बल्कि एक महिला अधिकारी की गरिमा पर सीधा हमला है।
निष्कर्ष – प्रशासनिक सख्ती की मांग
प्रशासनिक हलकों में इस घटना ने गहरी चिंता पैदा कर दी है। सवाल अब यह है कि शासन इस गंभीर घटना पर कितना कठोर रुख अपनाता है।
Suniye Bharat की राय में — यदि प्रशासनिक सेवा में इस तरह के बर्ताव पर त्वरित और सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह पूरे तंत्र की साख और महिला अधिकारियों की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है।
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